अवैध कोयला कारोबार को नक्सली संरक्षण : आइजी

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गिरिडीह : उग्रवाद प्रभावित गिरिडीह समेत अन्य जिलों में चल रहे कोयले के अवैध धंधे को माओवादियों का भी संरक्षण प्राप्त है। इस नेटवर्क को तोड़ने में पुलिस लगी हुई है। जहां तक झारखंड-बिहार के सीमांत क्षेत्रों में उग्रवाद के खिलाफ पुलिस को मिल रही सफलता का सवाल है तो यह पुलिस के बेहतर तालमेल का परिणाम है। मंगलवार को यहां परिसदन में आइजी मुरारी लाल मीणा ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि गिरिडीह समेत कई जिलों के जंगलों में अवैध कोयला डंप किया जाता है। ऐसा बगैर नक्सली संरक्षण के नहीं हो सकता। धंधेबाज नक्सलियों को लेवी देते हैं। पुलिस इस नेटवर्क को तोड़ने में लगी है। अभियान के दौरान काफी मात्रा में अवैध कोयला जब्त भी किया गया। कहा कि पारसनाथ पहाड़ समेत बिहार के जमुई सीमांत क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की समीक्षा की। जंगल में एक भी नक्सली यदि हथियार के साथ रहेगा तो यह माना जाएगा कि उग्रवाद खत्म नहीं हुआ है। पारसनाथ में नक्सली गतिविधियों पर पुलिस की नजर है। पुलिस सूचना तंत्र को मजबूत कर रही है। जरूरत पड़ी तो पुलिस कांबिंग आपरेशन भी चलाएगी। आइजी ने कहा कि पहले की अपेक्षा बिहार पुलिस से तालमेल बढ़ा है। बेहतर समन्वय की वजह से ही गिरिडीह-जमुई जिलों में नक्सलियों का प्रभाव घटा है और दोनों राज्यों की पुलिस का दबदबा बढ़ा है। बीजसेक के प्रभारी सह जेबी जोन के प्रभारी परवेज दा की गिरफ्तारी गिरिडीह पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है। गिरिडीह एसपी अमोल वेणुकांत होमकर, सीआरपीएफ समेत पूरी पुलिस टीम बधाई की पात्र है। गिरिडीह में उग्रवाद खत्म करने को इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान के तहत तीस करोड़ रुपए मिले हैं। स्वीकृति के लिए योजनागत अनुशंसा भेजी जा रही है। विकास से जुड़ी छोटी-छोटी योजनाओं पर काम होगा। उनके साथ एसपी अमोल वेणुकांत होमकर एवं एएसपी अभियान संजय प्रसाद भी थे।

Courtesy: Dainik jagran 03.04.2012


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