माओवादी नेता किशन जी मुठभेड़ में मारा गया

रांची: झारखण्ड में सुरक्षा बलों ने नक्सली नेता कुंदन पाहन को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए हैं। बीते तीन साल से पाहन यहां आतंक का पर्याय बना हुआ है। पुलिस अधिकारी एसएन प्रधान ने शुक्रवार को कहा, "यह सीमावर्ती इलाकों से नक्सलियों के खात्मे की हमारी रणनीति को पुनर्परिभाषित करने का सही समय है।"एक दिन पहले ही पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में नक्सली नेता किशनजी मारा गया था। पाहन पर साल 2008 में पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या करने का आरोप है। उस पर इसी साल 5.5 करोड़ रुपये की लूट का भी आरोप है। उसने 2009 में कथित तौर एक खुफिया अधिकारी फ्रांसिस इन्दवार का सिर कलम कर दिया था। वह और उसके साथी रांची व जमशेदपुर राजमार्ग पर 35 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर चुके हैं। किशनजी के मारे जाने के बाद पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे इलाकों में हिंसा के डर से सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

Courtsey: Bhaskar.com 25.11.2011

 

कोलकाता: माओवादियों के शीर्ष नेता किशन जी की गुरुवार को पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के एक जंगल में संयुक्त बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। एक दिन पहले ही वह इस जगह से बचकर निकल गए थे। उग्रवाद निरोधी बल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि 58 वर्षीय मोलाजुला कोटेश्वर राव की पहचान मुठभेड़ के बाद की गई, जिन्हें किशन जी कहा जाता है। तेलुगू भाषी किशन जी माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य थे और संगठन के तीसरे नंबर के ओहदेदार थे। वह वर्ष 2009 से जंगलमहल में सशस्त्र अभियान के प्रभारी थे। सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि किशन जी अपने कुछ साथियों और एक अन्य मारे जा चुके माओवादी नेता की पत्नी सुचित्रा महतो, जिनके साथ वह रह रहे थे, के साथ कुशबनी जंगल में छिपे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि इलाके को घेर लिया गया और मुठभेड़ हुई। किशन जी के चार स्तर के सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया गया। किशनजी वर्ष 2009 से कुशबनी जंगल से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। जामबनी थाना क्षेत्र में बुरिसोल जंगल में आज मुठभेड़ शुरू हुई। यह इलाका झारखंड सीमा के पास कुशबनी से करीब है। अधिकारी ने कहा कि किशन जी की पहचान उनके पास मिली एके-47 राइफल से हुई। सुचित्रा और अन्य सहयोगी मौके से फरार हो गए। संयुक्त बलों को इससे पहले पास के गोसाईबांध गांव से एक लैपटॉप बैग, किशन जी तथा सुचित्रा के लिखे कुछ पत्र तथा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त मिले। उधर, केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि किशन जी का मारा जाना नक्सलियों के लिए बड़ा झटका है क्योंकि वह भाकपा [माओवादी] के सांगठनिक ढांचे में तीसरे स्थान पर थे।

Courtesy: Dainik Jagran 24.11.2011


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