माओवादियों ने वालसा को रास्ते से हटाया

रांची: पाकुड़ की चर्चित सिस्टर वालसा जॉन हत्याकांड की जांच रिपोर्ट स्पेशल ब्रांच ने राज्य सरकार को भेज दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पैनम पर वर्चस्व जमाने के लिए नक्सलियों ने ग्रामीणों के सहयोग से वालसा को रास्ते से हटाया। पूर्व में पैनम कोल माइंस खोले जाने का विरोध वालसा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने किया था। काफी दिनों तक चले विरोध के बाद वालसा का पैनम कोल माइंस से समझौता हो गया था। समझौता होते ही ग्रामीणों का विरोध भी बंद हो गया। पैनम अपना काम आसानी से क्षेत्र में करने लगी। जब भी ग्रामीण कोई बात पैनम के विरोध में कहते तो वालसा आड़े आ जाती। यही माओवादियों को नागवार गुजरा। समझाने के बाद भी वालसा मानने को तैयार नहीं थी। पैनम पर अपना वर्चस्व जमाने के लिए माओवादियों ने धीरे-धीरे ग्रामीणों को प्रलोभन दे कर अपनी ओर मिलाना शुरू किया। इस काम में नक्सलियों को करीब एक साल लगा। अब माओवादियों ने वालसा की गतिविधियों पर नजर केंद्रित किया। माओवादियों ने इसके लिए आलूबेड़ा पंचायत के मुखिया प्रधान मुर्मू को सबसे पहले तैयार किया। प्रधान मुर्मू के बताने पर आलूबेड़ा व पचुवाड़ा के रंजन मरांडी, राकेश तुरी, ताला मरांडी, प्रेम तुरी, पायसिल हेम्ब्रम व एडविन मुर्मू का चुनाव किया गया। सभी को पहले वालसा की हत्या के लिए दो माह तक प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद राज्य स्थापना दिवस के दिन 15 नवंबर को वालसा की हत्या सातों ने मिलकर कर दी। घटना का नेतृत्व मुखिया प्रधान मुर्मू ने किया। मामले में स्थानीय पुलिस के अलावा अभी सीआइडी भी अपने स्तर से जांच कर रही है।

Courtesy:Dainikjagran28.11.2011


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